80वां महाधिवेशन 2026

 छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80 वाँ महाअधिवेशन बलौदाबाजार राज के पावन ग्राम चांपा छत्रपति शिवाजी सभा स्थल में पधारे प्रथम दिवस के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि माननीय श्री विजय बघेल जी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश कुर्मी क्षत्रिय समाज एवं सांसद, दुर्ग लोकसभा, द्वितीय सत्र के मुख्यअतिथि माननीय श्री भूपेश बघेल जी, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन एवं विधायक पाटन विधानसभा तथा द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि माननीय श्री रमेश बैस जी पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री, भारत शासन एवं द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय जी तथा सभी अतिविशिष्ट अतिथि एवं विशेष अतिथिगण समस्त केन्द्रीय संरक्षकगण, सलाहकारगण केन्द्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कनिष्ठ उपाध्यक्ष द्वय, महामंत्री, मंत्री द्वय, कोषाध्यक्ष, सचिव, सह सचिव एवं महाअधिवेशन के संयोजक राजप्रधान सम्माननीय श्रीमती सुनीता वर्मा जी राजप्रधान बलौदाबाजार राज व सभी राज के सम्माननीय राजप्रधानगण, केन्द्रीय युवा प्रमुख, केन्द्रीय महिला प्रमुख, सभी प्रकोष्ठों के सम्माननीय प्रकोष्ठ प्रभारी गण, समस्त केन्द्रीय कार्यकारिणी, युवा कार्यकारिणी एवं महिला कार्यकारिणी के सदस्यगण, महाअधिवेशन में उपस्थित सभी राज से पधारे देवतुल्य स्वजातीयगण युवा साथियों एवं मातृशक्ति को सादर नमन एवं अभिनंदन ...!

कुर्मी समाज हिन्दु सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, छत्तीसगढ़ राज के प्रथम स्वप्नदृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल, स्वामी आत्मानंद महाराज के आदर्शों पर चलने वाला समाज है। छत्तीसगढ़ में डॉ. खूबचंद बघेल, बृजलाल वर्मा, पुरुषोत्तम कौशिक, चंदूलाल चंद्राकर, भूपेश बघेल, अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक, रमेश बैस, विजय बघेल का देश व छत्तीसगढ़ के राजनीति में इन सब का विशेष सहयोग रहा है, जो छत्तीसगढ़ के हित में कार्य किये हैं और छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किये हैं। लेकिन वर्तमान में कुछ कमी महसूस की जा रही है। छत्तीसगढ़ के महापुरुषों की प्रतिमाओं का अपमान, छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति खंडन, छत्तीसगढ़ के महापुरुषों के नाम चलने वाली शासकीय योजनाओं का नाम परिवर्तन कर छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान के ललकारा जा रहा है। भाईयों एवं बहनों यही समय है सर्व छत्तीसगढ़िया समाज संगठित होकर छत्तीसगढ़ के अस्मिता व स्वाभिमान के रक्षा के लिए सामने आयें और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर चिंतन करें। छत्तीसगढ़ के जल, जंगल व जमीन की रक्षा करें।

छत्तीसगढ़ियों के सरलता, सहजता व भोलेपन का फायदा उठाकर बाहर प्रदेश से आये हुए लोगों द्वारा हमारे हक से हमें वंचित किया जा रहा है। ओकल फॉर लोकल का नारा वर्तमान में बहुत ही प्रचलन में हैं। हमें भी इस नारे को चरितार्थ करना है। यहाँ के उद्योग धंधों में, राजनीति, शिक्षा, रोजगार में स्थानीयता का भाव होना चाहिए। विशेषकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में शत् प्रतिशतत् छत्तीसगढ़ियों का अधिकार होना चाहिए।

$$\text{छत्तीसगढ़ में सब कुछ है बस कमी हैं स्वाभिमान की।}$$

$$\text{मुझसे सही नहीं जाती, ये चुप्पी वर्तमान की।।}$$

समाज में उच्च शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ी तो है लेकिन अपेक्षाकृत कम है। समाज में लगभग 95 प्रतिशत लोग शिक्षित है शासकीय नौकरियों में प्रतियोगिता काफी बढ़ चुकी है तथा हर पढ़े लिखे नवयुवकों को नौकरी मिल पाना संभव नहीं है, अतः हमारे समाज के सभी पालकों, माता-पिता व नवयुवकों-नवयुवतियों से आग्रह है कि अपना ध्यान व्यवसाय की ओर लगाएं। शासन की ओर से व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए कम ब्याज में सुलभ ऋण उपलब्ध कराई जा रही है तथा उनकी प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई जा रही है। उनका लाभ उठाएं और स्वावलंबी बनकर स्वयं परिवार और समाज को समृद्ध बनाएं। कोई भी व्यवसाय करने में संकोच न करें, छोटे-छोटे व्यवसाय से अपना आर्थिक क्षमता शिक्षा अनुभव के आधार पर काम शुरू करें। चाय दुकान, गुपचुप, सब्जी, होटल, किराना, कपड़ा, बिजली, बेकरी, मत्स्य पालन, उन्नत व जैविक कृषि, गौ पालन, मुर्गी पालन आदि। आप यदि ध्यान लगन व मेहनत से व्यवसाय करते हैं तो आपमें विश्वास जगेगा। आप व्यस्त रहेंगे तो नशा-पान आदि बुराइयों से दूर रहकर अपने परिवार की समृद्धि के लिए सहयोगी बनेंगे।

हमारे समाज में शिक्षा के प्रति जागृति आयी है, विशेषकर बालिका शिक्षा के प्रति उच्च शिक्षा का स्तर बालकों से कहीं अधिक है। हमारे समाज में बेटियाँ उच्च शिक्षा के साथ-साथ शासकीय व निजी नौकरियों के क्षेत्रों में संख्या निरंतर बढ़ रही है लेकिन हमारे ग्रामीण में भी बेटों के शिक्षा का स्तर घटते जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

आर्थिक परिस्थिति के कारण कोई बालक 10 वीं व 12 वीं के बाद आईटीआई करके प्राइवेट फैक्ट्री में काम करने लगते हैं और उच्च शिक्षा के लिए प्रयास नहीं करते जबकि लड़कियाँ स्नातक, स्नातकोत्तर की पढ़ाई स्वाध्यायी छात्रा के रूप में कर लेती है। जब विवाह की बारी आती है तो स्नातक लड़कियाँ 10 वीं 12 वीं पास लड़के से विवाह नहीं करना चाहती है। जिससे समाज में विवाह योग्य बेटे-बेटियों की उम्र बढ़ते जा रही है। कुछ पालकगण अपने लड़कों के बढ़ते उम्र की चिंता लेकर मेरे पास आये थे और अपना दुखड़ा सुना रहे थे कि हमारे बच्चों का उम्र 30 से 35 वर्ष का हो गया है। हम लोग बहुत से लड़की वालों से बात कर चुकें हैं परन्तु कोई घर तक नहीं आते हम लोग क्या करें? महोदय हमारे लड़के कुंठित हताश होते जा रहे हैं और कुछ तो नशा के आदि हो रहे हैं। समाज में कन्या नहीं मिलने की स्थिति में महोदय हमें अनाथालय के लड़कियों से विवाह करने की अनुमति प्रदान की जावे।

शहर में रहने वाले उच्च शिक्षित लोग अपने बच्चों का अन्तर्जातीय विवाह खुले आम कार्ड छपवाकर कर रहे हैं। पूछने पर बच्चों के पसंद के विरुद्ध हम नहीं जा सकते और सामाजिक नियमों का खुले आम उल्लंघन कर रहे हैं। कुछ स्रांत प्रभावशाली लोग छत्तीसगढ़ से बाहर जाकर अपने बच्चों का विवाह कर रहे हैं और ऐसे लोगों की सूचना के अभाव में उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। जबकि गांव में सामाजिक व्यवस्था मजबूत होने के कारण जैसे ही गांव वालों को पता चलता है तो समाज में उनके सूचना के आधार पर सामाजिक कार्यवाही की जाती है।

ऐसे मुझे जहाँ तक समझ में आया है कि कोई भी माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों की जानबूझकर अन्तर्जातीय विवाह नहीं करते। मजबूरीवश बच्चों के प्रेम-प्रसंग के कारण या समाज में बच्चों के योग्य वर या वधु नहीं मिलने के कारण उन्हें अन्तर्जातीय विवाह करना पड़ता है। बड़ी संख्या में बच्चे उच्च शिक्षा के लिए बड़े-बड़े शहरों में पढ़ाई करने व नौकरी करने जा रहे हैं और पढ़ाई या नौकरी के दौरान प्रेम संबंध हो जाता है और बच्चे जिद में उतर जाते हैं। जिसके करण माँ-बाप जिस बच्चे के लिए अपने जिंदगी भर की कमाई लगाए रहते हैं, उसके दबाव व प्रभाव में आकर मजबूर हो जाते हैं और उन्हें अन्तर्जातीय विवाह करना पड़ता है। साथ ही उच्चशिक्षा के कारण व सोशल मिडिया के प्रभाव से बच्चे जाति-पाति के बंधन से मुक्त होना चाहते हैं वे ये समझते हैं कि यदि शिक्षित अच्छे जाब वाले, अच्छे घर-परिवार है तो जाति महत्व नहीं रखता परिणाम स्वरूप अन्तर्जातीय विवाह की संख्या बढ़ती जा रही है। क्योंकि ऐसे बच्चे बड़े-बड़े मेट्रो सिटी में रहते है और वहीं बस जा रहे हैं और सामाजिक बंधन व प्रतिबंध का उस पर प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन उनका संबंध अपने माता-पिता व परिवार से बना रहता है और वे समाज से कटते जा रहे हैं ये समाज के सोचनीय विषय है।

अब प्रश्न उठता है कि संभ्रांत, सम्पन्न घर के बच्चों के ऊपर सामाजिक बंधन का प्रभाव नहीं पड़ रहा है। हमारे गांव में रहने वाले परिवार के बच्चे अगर अन्तर्जातीय विवाह करते हैं तो माँ-बाप व परिवार से उनका कोई संबंध नहीं रहता व गांव समाज का पूरा दबाव बना रहता है कोई आते जाते देख लिए तो उनके ऊपर कार्यवाही हो जाती है। इस प्रकार गांव व शहर में रहने वालों के बीच समाज की दोहरी नीति दिखाई दे रही है। गांव के भी बच्चे अन्तर्जातीय विवाह करने वाले बच्चे समाज के दबाव व उपेक्षा के कारण अपने माँ-बाप गांव समाज को छोड़कर शहर में रहकर अपना जीविकोपार्जन करते हैं।

भारतीय संविधान के अनुसार अन्तर्जातीय विवाह कोई अपराध नहीं है। साथ ही जिसे हम संभ्रांत, शिक्षित, समृद्ध समाज मानते हैं जैसे कि ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य में ऐसा कोई कठोर सामाजिक बंधन नहीं है। वे अन्तर्जातीय विवाह करने वाले को समाज से निलंबित / बहिस्कृत नहीं करते। छ.ग. में बहुत से पिछड़ा वर्ग के जातियों में भी अन्तर्जातीय विवाह करने वालों को कुछ दिनों बाद आर्थिक दण्ड के साथ समाज में मिला लेते हैं। अनुसूचित जातियों में तो जातीय बंधन ही नहीं है। जनजाति में भी जाति बंधन हमारे समाज जैसा कठोर नहीं है।

हमारे समाज में अन्तर्जातीय विवाह करने वालों को 14 वर्ष तक समाज के मुख्यधारा से अलग कर दिया जाता है और 14 वर्ष बाद उसके आर्थिक क्षमता के अनुसार 10,001 से 20,000 तक भोज आरोपित करते हैं और उनसे स्वेच्छानुदान व सहयोग राशि के रूप में सदस्यता के आधार पर राशि लेने की प्रचलन है।

अतः हमारे समाज में दोहरी दण्ड व्यवस्था है एक 14 वर्ष की सजा और 14 वर्ष पूर्ण होने पर आर्थिक दण्ड, इस पर समाज को गम्भीरता पूर्वक चिन्तन मनन करने की आवश्यकता है।

अपने समाज के प्रबुद्धवर्ग, युवा साथी व मातृशक्ति से निवेदन है कि इस विषय पर गम्भीरता पूर्वक चिन्तनकर अपना विचार खुला मंच के माध्यम से रखे ताकि इस विषय निर्वाचनी पर विचार किया जा सकें। हमारे कार्यकारिणी के एक वर्ष 3 माह के कार्यकाल में समस्त सम्मानीय राज प्रधानों के सहयोग से सादीपूर्ण शपथ समारोह के वार्षिक कार्य योजना तैयार कर अपना कार्य प्रारम्भ किये हैं जिसमें समाज के महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि का आयोजन, समाज के सभी वर्गों का सर्वे कार्य, महापुरुषों बहुद्देशीय भवन नरदहा में मूर्ति स्थापना, शौचालय का निर्माण 19 जुलाई 2025 को सभी समाज प्रमुखों के आतिथ्य में डॉ. खूबचंद बघेल जयंती, जन प्रतिनिधियों का सम्मान, दानदाताओं के सहयोग से नरदहा भवन के कमरों में ए.सी. पलंग, गद्दा की व्यवस्था, राज के कोषाध्यक्ष व स्वामी आत्मानंद विद्यापीठ के आय-व्यय के लेखा-जोखा के संधारण के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला, सभी राजप्रधान, सचिव को राजमंत्री का कार्यशाला का आयोजन ताकि कार्यवाही पंजीयन सही ढंग से संधारण किया जा सके। धरसींवा, तिल्दा व पलारी राज में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन दो छात्रों के उच्च शिक्षा के लिए सहयोग विगत कई वर्षों से प्रतिभा सम्मान के लिए 10000 की राशि प्रत्येक राज की दी जाती थी जिसे बढ़ाकर, पिछले वर्ष 16000 और इस वर्ष प्रत्येक राज को 20000 रु की राशि दी गई है।

स्वागत की लम्बी कड़ी को समाप्त करना, प्रबुद्ध वर्ग की अधिवेशनों में उद्बोधन, मार्गदर्शन लेना प्रस्तावित है।

हिन्दू से नफरत कर ये कुरान नहीं कहता, भारत की मस्जिदे तोड़ो ये श्रीराम नहीं कहता।

रोटी की कोई धरम नहीं होती, पानी की कोई जात नहीं होती जहाँ इंशानियत हो जिंदा, वहाँ जाति-धर्म की कोई बात नहीं होती।

किसी को लगता है, हिन्दू खतरे में हैं, और किसी को लगता है मुसलमान खतरें में है। धरम का चश्मा उतार कर देखों तो हिन्दुस्तान खतरे में हैं।।

अंत में आप सबके सहयोग व आशीर्वाद की अपेक्षा के साथ।

जय हिंद, जय भारत, जय छत्तीसगढ़ समाज गंगा की जय

आपका सेवक               
खोड़सराम कश्यप            
केन्द्रीय अध्यक्ष               
छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज
मो. : 9977503755          

 

छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज एक सामाजिक संगठन है जो छत्तीसगढ़ राज्य में निवासरत मनवा कुर्मी क्षत्रिय समुदाय से संबंधित लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। यह समाज मुख्य रूप से सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, और आर्थिक उन्नति के लिए कार्य करता है।

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